भाग मत



एक समय की बात है
छोटी सी एक गुड़िया थी
चलना न आता उसको
घुटनों के बल वो रेंगती थी |

फिर चलना सीखा उसने
नन्हे-नन्हे कदम बढ़ाना सीखा
पर थक कर गिर जाती चल के कुछ दूर
उठनाफिर से चलनाफिर गिर जाना |

वक़्त बीताकदम उसके हुए मज़बूत
अब दौड़ने भी लगी थी वो गुड़िया
और दौड़ना ऐसा कि थकती न थी
मीलों भागती और रूकती न थी |

जंगलपहाड़नदियांसमंदर
कच्ची-पक्की सड़को परपगडंडियों पर
पार कर बीहड़ गाँव और नवे शहर
भागती रही वोक्योंकि थकना उसने सीखा न था |

थम जा गुड़ियाथोड़ा सांस ले ले
भाग मत इतना कि ज़िन्दगी बिछड़ जाए
रुक के बैठभागने के सिवा बहुत कुछ है
छोटे-छोटे पल जी लेधीमे से गुज़र जाएंगे |

गुड़िया जिद्दी थीपर नादान न थीरुकना चाहती थी
पर गुज़रे हुए समय ने रुकने न दिया
आदत इतनी हो गयी थी भागने की
कि रुक न पाईबस भागती गयी...




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